25 साल बाद मनोहर पर्रिकर की सीट पर हुई हार

Asia Times Desk

नई दिल्ली: गोवा की पणजी विधानसभा सीट बचाने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विफल रही है. दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की परंपरागत सीट पणजी पर 25 साल बाद भाजपा की हार हुई है. पर्रिकर के निधन के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के अतानासियो मोन्सेरात ऊर्फ बाबुश मोन्सेरात ने भाजपा प्रत्याशी सिद्धार्थ कुनकालेंकर को 1,758 मतों से शिकस्त दी है. मोन्सेरात को 8,748 मत मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी 6,990 मत प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहे. वहीं, आम आम आदमी पार्टी (आप) के वाल्मीकि नाइक और गोवा सुरक्षा मंच के प्रत्याशी सुभाष वेलिंग्कर को क्रमश: 236 और 516 मत मिले. राज्य की शिरोडा विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार सुभाष शिरोडकर महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के दीपक धवालिकर को 66 मतों से पराजित करने में कामयाब रहे. जीत हासिल करने के बाद मोन्सेरात ने कहा, “यह कांग्रेस पार्टी और विकास के लिए मतदान की जीत है. पणजी पिछले कई साल से विकास से वंचित रहा है.”

पर्रिकर पहली बार 1994 में इस सीट से चुनाव जीते थे और वह 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल होने तक यहां से विधायक रहे. उनकी अनुपस्थिति में उनके सहयोगी कुनकालेंकर दोबारा इस सीट से विधायक रहे. 2018 में प्रदेश की राजनीति में वापसी के बाद पर्रिकर एक बार फिर पणजी से विधायक बने.  पणजी की हार भाजपा के लिए काफी मायने रखती है क्योंकि पार्टी ने पणजी की विरासत को संजोए रखने का वादा किया था.

पर्रिकर के पुत्र उत्पल पर्रिकर उपचुनाव में टिकट लेना चाहते थे जिसे भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने नजरंदाज कर दिया था. उत्पल पर्रिकर ने कहा कि यह हार दुखदाई है. उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में सामूहिक समझ जनता में होती है। हमें कड़ी मेहनत करके दोबारा जनता का भरोसा जीतना है.”

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